स्पिरिचुअल लाइफ क्या है?

स्पिरिचुअल लाइफ क्या है? बाहरी परिस्थितियां चाहे जैसी हों, उनके बावजूद भी अगर आप अपने अंदर से हमेशा प्रसन्न और आनंद में रहते हैं, तो आप आध्यात्मिक हैं। अगर आपको इस सृष्टि की विशालता के सामने खुद की स्थिति का एहसास बना रहता है तो आप आध्यात्मिक हैं।

स्पिरिचुअल का अर्थ क्या होता है? Spiritual का हिंदी में अर्थ (Spiritual Meaning in Hindi) या मतलब होता है : आध्यात्मिक।

आध्यात्मिक जीवन कैसे जिए? 

नीचे दिए गए संसाधनों में से चुनें:
  • जीने की कला का ज्ञान परमहंस योगानन्दजी की शिक्षाएं, विषयवस्तु के अनुसार आसानी से ढूंढे जा सकने हेतु
  • परमहंस योगानन्दजी की योगदा सत्संग पाठमाला ध्यान तथा आध्यात्मिक जीवन पर घर पर पढ़ने योग्य
  • YSS आश्रमों तथा केन्द्रों पर सामूहिक ध्यान तथा अन्य प्रेरणादायक कार्यक्रम

व्यावहारिक आध्यात्मिकता क्या है? इसका अर्थ है आत्मा का अध्ययन। अर्थात् अपना, स्वयं का अध्ययन। जो स्वयं को जान लेता है उसके लिए कुछ भी जानना शेष नहीं रहता।

स्पिरिचुअल लाइफ क्या है? – Additional Questions

गीता के अनुसार अध्यात्म क्या है?

अध्यात्म का अर्थ है अपने भीतर के चेतन तत्त्व को जानना। गीता के आठवें अध्याय में अपने स्वरुप अर्थात् जीवात्मा को अध्यात्म कहा गया है ‘परमं स्वभावोऽध्यात्मुच्यते’। आज के समय में योग, प्राणायाम और ध्यान को ही अध्यात्म समझा जाता है। परन्तु इसे जानने के लिए ये केवल साधन मात्र हैं।

आध्यात्मिक मनुष्य के दो पक्ष कौन से हैं?

आध्यात्मिक मनुष्य के दो पक्ष कौन से हैं? प्रत्येक वस्तु के २ पहलू होते हैं — एक उजला और दूसरा अंधेरा । उजला पक्ष उस वस्तु के गुणों को बतलाता है तो अंधेरा पक्ष उसके दोषों को प्रकट करता है । अध्यात्म का उजला पक्ष है सकारात्मक चिंतन अर्थात् पोजिटिव थिंकिंग ।

अध्यात्म और धर्म में क्या अंतर है?

अध्यात्म और धर्म में क्या अंतर है? अध्यात्म = आत्मा संबंधी या आत्मा परमात्मा के संबंध में चिन्तन-मनन। धर्म = धार्मिकता, श्रद्धा, ईमान, निष्ठा, यक़ीन, भक्ति।

आध्यात्मिकता का अर्थ क्या होता है?

आध्यात्मिक होने का अर्थ है कि व्यक्ति अपने अनुभव के धरातल पर यह जानता है कि वह स्वयं अपने आनंद का स्रोत है। आध्यात्मिकता का संबन्ध मनुष्य के आंतरिक जीवन से है और इसकी शुरुआत होती है– उसकी अंतर्यात्रा से।

मनुष्य के जीवन में आध्यात्मिक ज्ञान का क्या महत्व है?

आध्यात्मिक ज्ञान मानव को पतन की ओर अग्रसर होने से रोकता है। भौतिकता के कारण इंसान के अंदर जो अंधकार उत्पन्न हुआ है, उसे अध्यात्म के प्रकाश से ही दूर किया जा सकता है। आध्यात्मिक ज्ञान ही उसे यह समझाने में सहायक हो सकता है कि इस जगत का असली सृष्टिकर्ता और सर्वेसर्वा ईश्वर ही है। मानव तो उसकी एक रचना मात्र है।

आध्यात्मिक चेतना क्या है?

आध्यात्मिक चेतना का मतलब है यह बोध होना कि इस सृष्टि का सत्य अपदार्थ है । अर्थात् सत्य वह नहीं है जो दृश्य या अन्य प्रकार से अनुभवगम्य है । वल्कि सत्य वह है जो हमारी इंद्रियों की अनुभूति की सीमा से परे है । इस सत्य का आभास हम सबको कभी ना कभी अवश्य होता है ।

आध्यात्मिक विकास से मनुष्य को क्या मिलता है?

आध्यात्मिक विकास से तात्पर्य व्यक्ति में विद्यमान उस आध्यात्मिकता( Spirituality) का विकास करना है जो उसमे जन्मजात होती है और जिसके विकास के माध्यम से व्यक्ति को एसे आत्मज्ञान या आत्मनुभूति की प्राप्ति होती जो उसे ईश्वर तथा उसकी सृष्टि के साथ निकटता बनाये रखने में सहायक सिद्ध होती है।

आध्यात्मिक गुरु कौन है?

परम पूज्यनीय श्री श्री रविशंकर जी , सद्गुरु जी , माता अमृतानंदमयी जी , ये भारत में जन्मे आध्यात्मिक गुरु है । एक सच्चे गुरु की पहचान ये है की उनके शिष्य सभी धर्मो में और सभी देशो में पाए जाते हैं ।

इस संसार में सच्चा गुरु कौन है?

वह व्यक्ति जो किसी अन्य व्यक्ति को जीवन की सत्यता की अनुभूति करा सके,वही सच्चा गुरू है। जो व्यक्ति मनुष्य को ज्ञान प्रदान करे, सत्य के मार्ग पर चलने की प्रेरणा दे, उसे ही गुरु कहते है.

गुरु कितने प्रकार के होते हैं?

हिन्दू तथा सिक्ख धर्म में गुरु का अर्थ धार्मिक नेताओं से भी लगाया जाता है। सिक्खों के दस गुरु थे। आध्यात्मिक ज्ञान कराने वाले गुरु का स्थान इन सबमें ऊपर माना गया है। हालांकि इस तथ्य को आधार बनाकर कई मौका परस्त कथित लालची गुरुओं ने इस महानतम गुरु की पदवी को बदनाम भी किया है जिनमें कई उजागर भी हो चुके हैं

गुरु बनाने के लिए क्या करना चाहिए?

* सर्वप्रथम एक श्वेत वस्त्र पर चावल की ढेरी लगाकर उस पर कलश-नारियल रख दें। * उत्तराभिमुख होकर सामने शिवजी का चित्र रख दें। – ‘ॐ वेदादि गुरुदेवाय विद्महे, परम गुरुवे धीमहि, तन्नौ: गुरु: प्रचोदयात्।। ‘

गुरु का मंत्र क्या है?

आप किसी भी एक गुरु मंत्र का गुरुवार के दिन जप कर सकते हैं। ॐ ग्रां ग्रीं ग्रौं स: गुरवे नम:। ॐ ऐं श्रीं बृहस्पतये नम:। ॐ गुं गुरवे नम:।

भगवान और गुरु में क्या अंतर है?

गुरु ईश्वर का प्रतिनिधि है जो कि मनुष्य और ईश्वर के बीच कड़ी का काम करता है । गुरु तो हर समय इस धरा धाम में उपलब्ध रहते हैं लेकिन ईश्वर अवतार काल में ही भक्तों का उद्धार करने धरा धाम में आते हैं।

गुरु मंत्र कौन सा देना चाहिए?

गुरुमंत्र देवता का नाम, मंत्र, अंक अथवा शब्द होता है जो गुरु अपने शिष्य को जप करने हेतु देते हैं । गुरुमंत्र के फलस्वरूप शिष्य अपनी आध्यात्मिक उन्नति करता है और अंतत: मोक्ष प्राप्ति करता है । वैसे गुरुमंत्र में जिस देवता का नाम होता है, वही विशेष रूप से उस शिष्य की आध्यात्मिक प्रगति के लिए आवश्यक होते हैं ।

नहाने से पहले कौन सा मंत्र बोलना चाहिए?

गंगे च यमुने चैव गोदावरी सरस्वति। नर्मदे सिन्धु कावेरी जलऽस्मिन्सन्निधिं कुरु।।

गुप्त मंत्र क्या है?

कहते हैं कि गुप्त धन प्राप्ति के लिए माता का एक मंत्र है- ‘ॐ ह्रीं पद्मावति देवी त्रैलोक्यवार्ता कथय कथय ह्रीं स्वाहा।। ‘ इस मंत्र को रात्रि में सोने से पूर्व 1 माला रोज जपें।

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